रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय नेताओं पर एक ऐसा तीखा और अपमानजनक कटाक्ष किया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। पुतिन ने यूक्रेन युद्ध का पूरा ठीकरा यूरोपीय देशों और नाटो की नीतियों पर फोड़ते हुए उनके नेतृत्व को महज दो शब्दों के 'बचकाने' और 'अपमानजनक' विशेषण से नवाजा है। पुतिन का यह बयान न केवल कूटनीतिक मर्यादाओं को चुनौती देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि रूस और पश्चिम के बीच संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं। पुतिन ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यूरोपीय नेता स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं और वे केवल अमेरिका के इशारों पर चलने वाली कठपुतलियां बनकर रह गए हैं।
इस अपमानजनक टिप्पणी के पीछे पुतिन का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि यूरोप की वर्तमान पीढ़ी के नेता अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में अनुभवहीन और अदूरदर्शी हैं, जिनकी गलतियों के कारण ही आज पूरा महाद्वीप युद्ध की आग में झुलस रहा है। क्रेमलिन से आए इस बयान ने ब्रुसेल्स और वाशिंगटन में गुस्से की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि इसे एक वैश्विक मंच पर राष्ट्रप्रमुखों की 'प्लेग्राउंड इंसल्ट' यानी बच्चों की तरह की जाने वाली बेइज्जती के रूप में देखा जा रहा है। पुतिन के इस सख्त तेवर ने यह संकेत दे दिया है कि रूस अब किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है और वह पश्चिम की धमकियों का जवाब कड़े शब्दों और आक्रामक सैन्य रणनीति से देने के लिए तैयार है
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