"जैसे ही सूर्य की पहली सुनहरी किरणें हिमालय की उन बर्फ से ढकी गगनचुंबी चोटियों को छूती हैं जो सदियों से अडिग खड़ी रहकर मानवता को धैर्य का पाठ पढ़ा रही हैं, और जब घाटी में बहने वाली शीतल मंद पवन उन देवदार के वृक्षों के बीच से गुज़रती हुई एक मधुर संगीत पैदा करती है जिसे सुनकर मन की सारी व्याकुलता क्षण भर में शांत हो जाती है, तभी अचानक दूर कहीं किसी प्राचीन मंदिर की घंटियों की गूँज हवा में तैरने लगती है जो यह संदेश देती है कि समय निरंतर चलायमान है और किसी के लिए नहीं रुकता, फिर चाहे वह राजा हो या रंक, क्योंकि जीवन के इस विशाल रंगमंच पर हम सभी केवल कठपुतलियों के समान हैं जिनका संचालन नियति की उन अदृश्य डोरियों के माध्यम से होता है जिन्हें समझना किसी भी साधारण मनुष्य की बुद्धि से परे है, फिर भी हम अपनी छोटी सी दुनिया में अहंकार और ईर्ष्या के वशीभूत होकर ऐसे कर्म करते हैं मानो हमें यहाँ अनंत काल तक रहना हो, जबकि सत्य तो यह है कि प्रत्येक आने वाला क्षण हमें हमारी अंतिम यात्रा के करीब ले जा रहा है जहाँ न कोई धन काम आता है और न ही वह पद जिसे पाने के लिए हमने जीवन भर संघर्ष किया, और इसी संघर्ष के बीच जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि असली सुख तो उन छोटी-छोटी खुशियों में था जिन्हें हमने बड़ी सफलता की दौड़ में कहीं पीछे छोड़ दिया था, जैसे वह माँ के हाथ का बना भोजन, वह बचपन के दोस्तों के साथ की गई बेमतलब की बातें, वह पहली बारिश की मिट्टी की सौंधी खुशबू जिसे महसूस करने का अब हमारे पास समय नहीं है क्योंकि हम मशीनों के इस युग में स्वयं भी मशीन बन चुके हैं जहाँ संवेदनाओं का स्थान डेटा ने ले लिया है और प्रेम की जगह केवल स्वार्थ की गणना रह गई है, फिर भी प्रकृति हार नहीं मानती और हर साल वसंत के रूप में नए फूल खिलाकर हमें यह याद दिलाती है कि राख के ढेर से भी नया जीवन जन्म ले सकता है, बशर्ते हमारे भीतर वह विश्वास और अटूट संकल्प शेष हो जो एक छोटे से बीज को अंधेरी ज़मीन को चीरकर सूरज की रोशनी की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है, और अंततः यही वह शाश्वत चक्र है जो ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु को आपस में जोड़ता है और हमें यह अहसास कराता है कि हम सब अलग-अलग लहरें होने के बावजूद वास्तव में उसी एक विशाल चेतना के सागर का हिस्सा हैं जिसे अलग करना असंभव है।"
मुख्य बातें:
यह वाक्य विराम चिह्नों और संयोजकों की मदद से बना है ताकि एक निरंतरता बनी रहे।
इसमें प्रकृति, समय, जीवन की नश्वरता और मानवीय भावनाओं का चित्रण किया गया
है।





























