मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा गर्मायी रहती है, लेकिन हाल के दिनों में 'ठाकरे ब्रदर्स' यानी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की राजनीतिक भूमिकाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलकल मचा दी है। संजय राउत ने राज ठाकरे के आगामी रुख और बीएमसी में उनकी संभावित भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज ठाकरे के आने से उनकी पार्टी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, बल्कि इससे विपक्षी खेमे में ही विभाजन होगा।
संजय राउत का यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी दल और सत्तारूढ़ गठबंधन लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि बीएमसी में दशकों तक शासन करने के बावजूद ठाकरे परिवार मुंबई की बुनियादी समस्याओं को सुलझाने में विफल रहा है। राउत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुंबई का विकास शिवसेना (UBT) की प्राथमिकता रही है और जनता जानती है कि किसने उनके लिए काम किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि "ठाकरे ब्रदर्स" फेल नहीं हुए हैं, बल्कि उन्हें बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है।
राज ठाकरे की मनसे (MNS) के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए राउत ने संकेत दिया कि राज ठाकरे की सक्रियता से अंततः भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को ही नुकसान होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि शिवसेना (UBT) का कैडर और मुंबई का मतदाता उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़ा है। राउत ने यह भी कहा कि गठबंधन की राजनीति में चेहरे बदलते रहते हैं, लेकिन मुंबई की अस्मिता और बीएमसी पर नियंत्रण की लड़ाई में अंततः जीत 'मशाल' (उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न) की ही होगी।
संजय राउत ने आगे तर्क दिया कि बीएमसी में ठाकरे परिवार की पकड़ केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मुंबई के मध्यम वर्गीय मराठी मानुस के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली की नजरें मुंबई के खजाने पर हैं और वे इसे लूटने के लिए फूट डालो और राज करो की नीति अपना रहे हैं। राज ठाकरे का नाम लिए बिना उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों को केवल चुनाव के समय ही मुंबई की याद आती है, जबकि उद्धव ठाकरे ने कोविड संकट के दौरान खुद को साबित किया है।
अंत में, राउत का यह बयान चुनावी बिसात पर एक महत्वपूर्ण चाल माना जा रहा है। यह न केवल उनके कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए है, बल्कि यह संदेश देने के लिए भी है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना किसी भी चुनौती, चाहे वह घर के अंदर से हो या बाहर से, उसका सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बीएमसी चुनाव का परिणाम ही यह तय करेगा कि 'ठाकरे ब्रांड' का जादू अब भी बरकरार है या नहीं, लेकिन फिलहाल संजय राउत के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बैकफुट पर जाने को तैयार नहीं हैं।