भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों 'वापसी' की गूँज सुनाई दे रही है। पहले ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाकर और अपनी कप्तानी से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा, और अब ठीक उसी राह पर तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की किस्मत भी चमकती नजर आ रही है। टखने की सर्जरी और लंबे रिहैबिलिटेशन के बाद शमी के भविष्य पर कई सवालिया निशान थे, लेकिन बंगाल के लिए रणजी ट्रॉफी और घरेलू टी20 मैचों में उनकी हालिया गेंदबाजी ने यह साफ कर दिया है कि उनके तरकश में तीर अभी भी उतने ही नुकीले हैं।
खुद को साबित करने का यह सुनहरा मौका शमी के लिए केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि टीम इंडिया के तेज गेंदबाजी आक्रमण को फिर से मजबूती देने का जरिया है। शमी ने अपनी फिटनेस टेस्ट के दौरान न केवल घंटों गेंदबाजी की, बल्कि अपनी पुरानी लय और गति से बल्लेबाजों को मुश्किल में डालकर यह संदेश दिया कि वह चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बीसीसीआई और चयनकर्ता भी अब शमी के अनुभव को दरकिनार नहीं कर सकते, क्योंकि बड़े टूर्नामेंटों में उनके जैसा विकेट लेने वाला गेंदबाज किसी भी टीम के लिए 'एक्स-फैक्टर' साबित होता है। जिस तरह ईशान किशन ने अनुशासन और प्रदर्शन के दम पर अपनी जगह फिर से बनाई, शमी की यह कड़ी मेहनत भी इशारा कर रही है कि टीम इंडिया का यह दिग्गज एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना परचम लहराने के लिए बेकरार है
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