यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर तब तूल पकड़ लिया जब हालिया रूसी हमलों के बाद राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कड़े शब्दों में वैश्विक समुदाय को संबोधित किया। ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट रूप से कहा कि "रूस शांति नहीं चाहता", बल्कि उसका असली मकसद यूक्रेन को पूरी तरह अस्थिर करना और तबाही मचाना है। उनके इस बयान में उस गहरे दर्द और हताशा की झलक मिलती है, जो पिछले कई वर्षों से जारी युद्ध के कारण यूक्रेन झेल रहा है। ज़ेलेंस्की का मानना है कि रूस की ओर से की जा रही शांति की बातें केवल एक दिखावा हैं, जबकि धरातल पर उसकी मिसाइलें निर्दोष नागरिकों और बुनियादी ढांचों को निशाना बना रही हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध विराम की कोशिशें तेज हो रही थीं, लेकिन हमलों की तीव्रता ने इन कूटनीतिक प्रयासों पर सवालिया निशान लगा दिया है। ज़ेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि रूस के साथ किसी भी समझौते पर तब तक भरोसा नहीं किया जा सकता जब तक वह अपनी विस्तारवादी नीति और हिंसा का मार्ग नहीं त्याग देता। उनके अनुसार, शांति केवल बातचीत की मेज पर नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में रूस की आक्रामकता को रोककर ही संभव है। यह स्थिति न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है, जहाँ शांति की राह अब और भी कठिन और अनिश्चित नजर आने लगी है
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