अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और वहां हो रहे अवैध खनन को लेकर गहराते विवाद के बीच भारत के उच्चतम न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में 'स्वत: संज्ञान' (Suo Motu) लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी से खिलवाड़ को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पिछले कुछ समय से राजस्थान और हरियाणा के क्षेत्रों में फैली अरावली की पहाड़ियों पर अवैध कब्जों और पहाड़ों को काटकर किए जा रहे निर्माण कार्यों की खबरें लगातार सुर्खियां बन रही थीं, जिससे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है।
अदालत ने इस संवेदनशील मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को मामले की सुनवाई करने का निर्णय लिया है। पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अरावली के फेफड़ों कहे जाने वाले जंगलों को भू-माफियाओं द्वारा नष्ट किया जा रहा है, जिससे दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण और जलस्तर की समस्या विकराल होती जा रही है। शीर्ष अदालत का यह हस्तक्षेप उन सभी पक्षों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अदालती आदेशों की अवहेलना कर प्राकृतिक धरोहरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। सोमवार को होने वाली इस सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट अरावली को बचाने के लिए कुछ कड़े और निर्णायक दिशा-निर्देश जारी कर सकता है
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