भारत और ओमान के बीच आज होने वाला 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (FTA) न केवल द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह 10 अरब डॉलर के मौजूदा कारोबार को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। इस व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के साथ ही भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) के अन्य देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करने के द्वार खुल जाएंगे, जिससे पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक पैठ गहरी होगी। इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सीमा शुल्क (Customs Duty) में भारी कटौती होगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में सीधी और सस्ती पहुंच मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान के साथ यह रणनीतिक साझेदारी भारत के लिए एक कूटनीतिक जीत भी है, क्योंकि ओमान खाड़ी देशों के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है, जो भविष्य में अन्य अरब और अफ्रीकी बाजारों के लिए एक सुगम रास्ता तैयार करेगा। यह डील प्रधानमंत्री मोदी की 'एक्ट वेस्ट' नीति का एक सफल परिणाम है, जो न केवल निवेश के नए अवसर पैदा करेगी बल्कि भारत में रोजगार सृजन और विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ी गति प्रदान करेगी। आज का यह दिन भारतीय विदेश नीति और वैश्विक वाणिज्यिक रणनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो आने वाले दशकों में भारत को एक वैश्विक व्यापारिक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है
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