यह क्रिकेट इतिहास का वह स्वर्णिम और साहसी अध्याय है, जिसे आज की पीढ़ी शायद ही जानती हो; सन 2000 के दौर में जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत बांग्लादेश को टेस्ट क्रिकेट की मुख्यधारा में शामिल करने के प्रति पूरी तरह उदासीन और संशय में था, तब केवल भारत ही वह शक्ति बनकर उभरा जिसने पड़ोसी धर्म निभाते हुए उनके हक की लड़ाई लड़ी। उस समय दुनिया के कई दिग्गज क्रिकेट बोर्ड बांग्लादेश की अनुभवहीनता और बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला देकर उन्हें 'टेस्ट स्टेटस' देने के विरोध में थे, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के तत्कालीन अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने एक दूरदर्शी रणनीतिकार की भूमिका निभाई और वैश्विक मंच पर बांग्लादेश का पुरजोर समर्थन किया। भारत के इसी अडिग स्टैंड और कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम था कि आईसीसी (ICC) को झुकना पड़ा और बांग्लादेश को 10वें टेस्ट राष्ट्र के रूप में मान्यता मिली। इतना ही नहीं, भारत ने अपनी खेल भावना का परिचय देते हुए बांग्लादेश के ऐतिहासिक पहले टेस्ट मैच के लिए ढाका का दौरा किया, जिससे न केवल वहां क्रिकेट की नींव मजबूत हुई, बल्कि एशियाई क्रिकेट में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। सच तो यह है कि आज बांग्लादेश क्रिकेट जो भी मुकाम हासिल कर पाया है, उसके पीछे भारत का वह निस्वार्थ और ऐतिहासिक समर्थन सबसे बड़ी ढाल बना था।
Monday, January 5, 2026
जब पूरी दुनिया थी खिलाफ, तब भारत ने ऐसे दिलाई बांग्लादेश को 'टेस्ट टीम' की पहचान! 🇮🇳🇧🇩
यह क्रिकेट इतिहास का वह स्वर्णिम और साहसी अध्याय है, जिसे आज की पीढ़ी शायद ही जानती हो; सन 2000 के दौर में जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत बांग्लादेश को टेस्ट क्रिकेट की मुख्यधारा में शामिल करने के प्रति पूरी तरह उदासीन और संशय में था, तब केवल भारत ही वह शक्ति बनकर उभरा जिसने पड़ोसी धर्म निभाते हुए उनके हक की लड़ाई लड़ी। उस समय दुनिया के कई दिग्गज क्रिकेट बोर्ड बांग्लादेश की अनुभवहीनता और बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला देकर उन्हें 'टेस्ट स्टेटस' देने के विरोध में थे, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के तत्कालीन अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने एक दूरदर्शी रणनीतिकार की भूमिका निभाई और वैश्विक मंच पर बांग्लादेश का पुरजोर समर्थन किया। भारत के इसी अडिग स्टैंड और कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम था कि आईसीसी (ICC) को झुकना पड़ा और बांग्लादेश को 10वें टेस्ट राष्ट्र के रूप में मान्यता मिली। इतना ही नहीं, भारत ने अपनी खेल भावना का परिचय देते हुए बांग्लादेश के ऐतिहासिक पहले टेस्ट मैच के लिए ढाका का दौरा किया, जिससे न केवल वहां क्रिकेट की नींव मजबूत हुई, बल्कि एशियाई क्रिकेट में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। सच तो यह है कि आज बांग्लादेश क्रिकेट जो भी मुकाम हासिल कर पाया है, उसके पीछे भारत का वह निस्वार्थ और ऐतिहासिक समर्थन सबसे बड़ी ढाल बना था।
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